TRW Insight / बांग्लादेश
विदेशी सीधे ज़मीन नहीं रख सकते, भारतीय आर्थिक क्षेत्र रद्द हो चुके हैं और अद्यतन खतियान अब हर बिक्री की शर्त है। भारतीय खरीदार हो या भारत में बसा उत्तराधिकारी, सही क्रम और सही दस्तावेज़ ही संपत्ति और पैसे को सुरक्षित रखते हैं।
बांग्लादेश में संपत्ति कानून: भारतीय कंपनियों और परिवारों के लिए 2026 की स्थिति
बांग्लादेश का संपत्ति कानून भारतीय कंपनियों, निवेशकों और उन परिवारों के लिए सबसे व्यावहारिक कानूनी प्रश्नों में से एक है जिनकी पैतृक ज़मीन या मकान आज भी बांग्लादेश में है। ढाका में कार्यालय लेने वाली भारतीय कंपनी, आर्थिक क्षेत्र में प्लॉट देखने वाला निर्माता और कोलकाता या अगरतला में बसा परिवार जो पैतृक ज़मीन बेचना या बाँटना चाहता है — तीनों के लिए नियम और दस्तावेज़ अलग हैं।
यह मार्गदर्शिका विदेशी स्वामित्व की सीमाएँ, पट्टा और आर्थिक क्षेत्र, स्वामित्व जांच (खतियान, नामांतरण और भार-मुक्ति तलाशी), पंजीकरण प्रक्रिया और लागत, भारत में बसे उत्तराधिकारियों की विरासत, शत्रु और अर्पित संपत्ति (Enemy/Vested Property) की विरासत, विदेश से पावर ऑफ़ अटॉर्नी द्वारा बिक्री और विवाद समाधान को भारतीय दृष्टिकोण से समझाती है।

सारांश: विदेशी व्यक्ति बांग्लादेश में सीधे ज़मीन के मालिक नहीं बन सकते; वे पट्टे या किराए पर संपत्ति ले सकते हैं, और व्यवहार में स्वीकृतियों के साथ फ़्लैट खरीदने की अनुमति रही है। भारतीय कंपनी के लिए सामान्य रास्ता बांग्लादेश में निगमित सहायक कंपनी है, जो अपने नाम पर ज़मीन रख या पट्टे पर ले सकती है। हर लेन-देन से पहले खतियान, नामांतरण, भूमि विकास कर और सब-रजिस्ट्री रिकॉर्ड की जाँच अनिवार्य है। भारत में रहने वाले उत्तराधिकारी विरासत का दावा कर सकते हैं, पर अर्पित संपत्ति सूची, नागरिकता-आधारित सीमाएँ और बिक्री राशि भारत भेजने के नियम पहले से जाँचने होते हैं।
मुख्य बिंदु: भूमि अपराध प्रतिरोध एवं प्रतिकार अधिनियम 2023 (Land Crime Prevention and Remedy Act 2023) की धारा 6(3) के अनुसार जिस व्यक्ति के नाम पर अद्यतन खतियान नहीं है और जो हाल का भूमि विकास कर भुगतान नहीं दिखा सकता, वह न ज़मीन बेच सकता है, न दान कर सकता है, न उस पर पावर ऑफ़ अटॉर्नी दे सकता है। विदेश में बैठे उत्तराधिकारी के लिए पहला काम बिक्री नहीं, बल्कि रिकॉर्ड को अपने नाम पर अद्यतन कराना है।
एक नज़र में
विदेशी स्वामित्व
विदेशी व्यक्ति सीधे ज़मीन नहीं रख सकते; पट्टा, किराया या विदेशी स्वामित्व वाली स्थानीय कंपनी ही व्यावहारिक रास्ते हैं।
आर्थिक क्षेत्र
BEPZA सर्विस्ड प्लॉट 30 वर्ष के पट्टे पर देता है; BIDA और BEZA अब इन्वेस्ट बांग्लादेश में विलीन हैं।
स्वामित्व जांच
खतियान, नामांतरण, भूमि विकास कर रसीद, 25 वर्ष का स्वामित्व इतिहास और सब-रजिस्ट्री तलाशी।
विरासत और अर्पित संपत्ति
23 मार्च 1974 के बाद किसी संपत्ति को नए सिरे से अर्पित सूची में नहीं डाला जा सकता था; वापसी कानून नागरिकता से बंधा है।
विदेश से बिक्री
बिक्री का पावर ऑफ़ अटॉर्नी अपरिवर्तनीय है, उसका पंजीकरण अनिवार्य है और विदेश में हस्ताक्षर के बाद ढाका में प्रमाणीकरण ज़रूरी है।
विषय सूची
भारतीय पाठकों के लिए बांग्लादेश का संपत्ति कानून: मूल ढाँचा
बांग्लादेश का संपत्ति कानून उन्हीं औपनिवेशिक क़ानूनों पर टिका है जिनसे भारतीय पाठक परिचित हैं, पर दोनों देशों के संशोधन अलग दिशाओं में गए हैं। संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882 (Transfer of Property Act 1882) की धारा 54 कहती है कि मूर्त अचल संपत्ति की बिक्री केवल पंजीकृत दस्तावेज़ से हो सकती है, और धारा 54A के अनुसार बिक्री का अनुबंध भी लिखित और पंजीकृत होना चाहिए।[7] पंजीकरण अधिनियम 1908 (Registration Act 1908) प्रक्रिया और समय-सीमा तय करता है।[8]
भूमि अभिलेख राज्य अधिग्रहण और काश्तकारी अधिनियम 1950 (State Acquisition and Tenancy Act 1950) के खतियान पर आधारित हैं, जिन्हें 2023 के भूमि अपराध अधिनियम ने लेन-देन की शर्त बना दिया है।[9] उत्तराधिकार धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानून से और विदेशी मुद्रा बांग्लादेश बैंक (Bangladesh Bank) के परिपत्रों से नियंत्रित है।
भारत से तुलना में सबसे बड़े अंतर
भारत में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 ने बेटी, बेटे, विधवा और माँ को बराबर हिस्सा दिया; बांग्लादेश में ऐसा कोई संहिताबद्ध परिवर्तन नहीं हुआ और हिंदू परिवार आज भी पारंपरिक दायभाग नियमों से चलते हैं।[13] दूसरा बड़ा अंतर बिक्री अनुबंध (बायना) का अनिवार्य पंजीकरण है: पंजीकरण अधिनियम की धारा 17A के तहत इसे निष्पादन के साठ दिनों के भीतर पंजीकरण के लिए प्रस्तुत करना होता है।[8] तीसरा अंतर अर्पित संपत्ति की विरासत है।
क्या विदेशी नागरिक बांग्लादेश में ज़मीन खरीद सकते हैं?
संक्षिप्त उत्तर है: सीधे नहीं। Chambers की 2026 की बांग्लादेश निवेश मार्गदर्शिका के अनुसार विदेशी व्यक्ति या संस्थाएँ बांग्लादेश में सीधे ज़मीन की मालिक नहीं हो सकतीं; वे केवल ग़ैर-स्थायी पट्टा या किराया ले सकती हैं।[1] हमें ऐसा कोई क़ानून ज्ञात नहीं जो यह प्रतिबंध स्पष्ट शब्दों में लगाता हो; यह प्रशासनिक व्यवहार, स्वीकृतियों और विदेशी मुद्रा नियमों से लागू होता है, और सब-रजिस्ट्रार ऐसा दस्तावेज़ पंजीकृत नहीं करेगा। इसे बाध्यकारी नियम मानकर चलें। भारतीय मूल के व्यक्ति के लिए भी निर्णायक प्रश्न जन्मस्थान नहीं, वर्तमान नागरिकता है।
फ़्लैट: सीमित और स्वीकृति-आधारित रास्ता
अगस्त 2023 की एक रिपोर्ट में पंजीकरण निदेशालय के अधिकारी के अनुसार सरकार ने 1996 से विदेशियों को केवल फ़्लैट खरीदने की अनुमति दी है, जिसके लिए BIDA, बांग्लादेश बैंक और राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (NBR) की अनुमति चाहिए।[2] भुगतान डॉलर में करना होता है, और RAJUK या चटगाँव विकास प्राधिकरण जैसी सरकारी एजेंसियों की परियोजनाओं में विदेशी आवासीय इकाई नहीं खरीद सकते।[2]
भारतीय कंपनी के लिए स्थानीय सहायक कंपनी
Chambers के अनुसार 100 प्रतिशत या उससे कम विदेशी स्वामित्व वाली स्थानीय कंपनी ज़मीन की मालिक हो सकती है या उसे पट्टे पर ले सकती है, और विदेशी ऐसी कंपनी के शेयर रख सकते हैं।[1] 2023 की रिपोर्ट में पंजीकरण अधिकारी ने भी कहा कि बांग्लादेश में काम करने की अनुमति प्राप्त विदेशी कंपनी अपने नाम पर ज़मीन और मकान खरीद सकती है।[2] सहायक कंपनी बनाने की प्रक्रिया हमारी हिंदी मार्गदर्शिका बांग्लादेश में कंपनी पंजीकरण में है, और ढाँचे, कर तथा निकास का विश्लेषण foreign investment in Bangladesh real estate में।
पट्टा, किराया और आर्थिक क्षेत्र
विदेशी कंपनी या उसकी शाखा के लिए पट्टा सबसे सीधा रास्ता है। संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 107 के अनुसार साल-दर-साल का, एक वर्ष से अधिक अवधि का या वार्षिक किराया आरक्षित करने वाला पट्टा केवल पंजीकृत दस्तावेज़ से हो सकता है, और उस दस्तावेज़ पर पट्टादाता और पट्टेदार दोनों के हस्ताक्षर होने चाहिए।[7] पट्टा अनुबंध के प्रारूपण के बिंदु हमारी lease agreement मार्गदर्शिका में हैं।
EPZ और BEPZA के प्लॉट
निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्रों में स्वामित्व नहीं, पट्टा मिलता है। अक्टूबर 2025 की BEPZA निवेश पुस्तिका के अनुसार पूरी तरह विकसित प्लॉट 30 वर्ष के पट्टे पर और मानक फ़ैक्टरी भवन 2 वर्ष के नवीकरणीय पट्टे पर दिए जाते हैं, और 100 प्रतिशत विदेशी स्वामित्व की अनुमति है।[4] ऋणदाता के अधिकारों और पट्टे की शर्तों पर हमारा विश्लेषण economic zone lease and lender rights देखें।
इन्वेस्ट बांग्लादेश और भारतीय आर्थिक क्षेत्रों की स्थिति
इन्वेस्ट बांग्लादेश अधिनियम 2026 (Invest Bangladesh Act 2026) ने BIDA, बांग्लादेश आर्थिक क्षेत्र प्राधिकरण (BEZA) और PPP प्राधिकरण को एक संस्था में मिला दिया है, जिसने 23 अगस्त 2026 से काम शुरू किया।[3] विस्तार के लिए Invest Bangladesh Act 2026 पर हमारा विश्लेषण देखें।
भारतीय निवेशकों को यह भी जानना चाहिए कि 2015 के समझौते के तहत प्रस्तावित दो भारतीय आर्थिक क्षेत्र अब उपलब्ध नहीं हैं। मोंगला वाली परियोजना को अक्टूबर 2025 में सूची से हटाया गया और जून 2026 में उसी स्थल पर एक चीनी कंपनी के साथ समझौता हुआ।[5] मीरसराय में भारतीय आर्थिक क्षेत्र की योजना जून 2025 में रद्द हुई और जनवरी 2026 में वहाँ रक्षा आर्थिक क्षेत्र बनाने का निर्णय लिया गया।[6]

स्वामित्व जांच: संपत्ति कानून के तहत ड्यू डिलिजेंस
बांग्लादेश में ज़मीन के विवादों का बड़ा हिस्सा उन लेन-देन से निकलता है जिनमें खरीदार ने केवल विक्रेता का दस्तावेज़ देखा, अभिलेख नहीं। स्वामित्व जांच तीन प्रश्नों का उत्तर देती है: क्या विक्रेता ही एकमात्र मालिक है, क्या संपत्ति बंधक, कुर्की, अधिग्रहण या अर्पित सूची से मुक्त है, और क्या कब्ज़ा उसी के पास है। ड्यू डिलिजेंस की पूरी सूची हमारी अंग्रेज़ी मार्गदर्शिका land ownership verification and due diligence में है।
खतियान और नामांतरण
खतियान (record of rights) सर्वेक्षण के दौरान तैयार अधिकार-अभिलेख है, और नामांतरण वह प्रक्रिया है जिससे बिक्री या उत्तराधिकार के बाद राजस्व अभिलेख नए मालिक के नाम पर होता है। बिक्री दस्तावेज़ के पंजीकरण के समय पंजीकरण अधिनियम की धारा 52A विक्रेता के नाम पर नवीनतम खतियान, उत्तराधिकार से मालिक होने पर विक्रेता या उसके पूर्वज के नाम का खतियान, संपत्ति की प्रकृति, मूल्य और सीमाओं वाला नक्शा माँगती है।[8] नामांतरण की प्रक्रिया और अभिलेख सुधार के लिए हमारी land mutation मार्गदर्शिका देखें।
25 वर्ष का स्वामित्व इतिहास और शपथपत्र
धारा 52A बिक्री दस्तावेज़ में पिछले 25 वर्षों के स्वामित्व का संक्षिप्त विवरण और विक्रेता का यह शपथपत्र भी अनिवार्य करती है कि उसने संपत्ति पहले किसी को हस्तांतरित नहीं की और उसका स्वामित्व वैध है।[8] सर्वेक्षणों के क्रमिक खतियानों का मिलान करें और देखें कि श्रृंखला की कोई कड़ी संदिग्ध पावर ऑफ़ अटॉर्नी पर तो नहीं टिकी।
भार-मुक्ति की तलाशी और भूमि विकास कर
बांग्लादेश में भारत जैसा एकल भार-मुक्ति प्रमाणपत्र (encumbrance certificate) प्रचलित नहीं है; इसकी जगह सब-रजिस्ट्री के अभिलेखों की तलाशी ली जाती है। पंजीकरण अधिनियम की धारा 57 के तहत शुल्क देकर कोई भी व्यक्ति बुक संख्या 1 और उसके सूचकांकों का निरीक्षण कर सकता है और प्रविष्टियों की प्रतियाँ ले सकता है।[8] साथ में बंधक, कुर्की, लंबित मुकदमे, अधिग्रहण सूचना और अर्पित संपत्ति राजपत्र जाँचें, और स्थल पर वास्तविक कब्ज़ेदार की पहचान करें। भूमि विकास कर की अद्यतन रसीद भी अनिवार्य है, क्योंकि 2023 के अधिनियम की धारा 6(3) इसके बिना हस्तांतरण, पावर ऑफ़ अटॉर्नी या पंजीकरण पर रोक लगाती है।[9]
पंजीकरण प्रक्रिया और लागत
सही पंजीकरण प्रक्रिया ही विवाद-मुक्त स्वामित्व की नींव है। पंजीकरण अधिनियम की धारा 23 के अनुसार वसीयत को छोड़कर कोई भी दस्तावेज़ निष्पादन की तारीख से तीन महीने के भीतर सही अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत न होने पर पंजीकरण के लिए स्वीकार नहीं होगा।[8] सामान्य क्रम यह है: स्वामित्व जांच, पंजीकृत बायना, कर और शुल्क का भुगतान, सब-रजिस्ट्रार के सामने बिक्री विलेख का निष्पादन और पंजीकरण, फिर नामांतरण।
बायना: अनिवार्य पंजीकृत बिक्री अनुबंध
धारा 17A के अनुसार अचल संपत्ति की बिक्री का अनुबंध लिखित, दोनों पक्षों द्वारा निष्पादित और पंजीकृत होना चाहिए, और इसे निष्पादन के साठ दिनों के भीतर पंजीकरण के लिए प्रस्तुत करना होता है।[8] अपंजीकृत समझौते पर दी गई अग्रिम राशि बाद में विशिष्ट पालन (specific performance) के मुकदमे में कमज़ोर आधार बनती है।
लागत: शुल्क और कर
पंजीकरण लागत एक शुल्क नहीं, बल्कि कई अलग-अलग भुगतानों का जोड़ है। जून 2025 के अंतिम बजट पर प्रथम आलो की रिपोर्ट के अनुसार ढाका में पंजीकरण शुल्क 1 प्रतिशत, स्टांप शुल्क 1.5 प्रतिशत और स्थानीय सरकार शुल्क 3 प्रतिशत था, जबकि स्रोत कर ढाका और चटगाँव सिटी कॉर्पोरेशन में 8 से घटकर 5 प्रतिशत, अन्य सिटी कॉर्पोरेशन में 6 से 3 प्रतिशत और पौरसभाओं में 4 से 2 प्रतिशत हुआ।[10] उसी रिपोर्ट के अनुसार ढाका में फ़्लैट और ज़मीन की कुल लागत लगभग 12.5 प्रतिशत आँकी गई।[10]
स्रोत कर में मौज़ा और भूमि वर्ग के अनुसार प्रति डेसिमल न्यूनतम राशि भी होती है। 2026 के स्रोत कर नियमों की पूरी तालिका और उदाहरण हमारी property registration fees मार्गदर्शिका में हैं। दस्तावेज़ में कम मूल्य दिखाना बचत नहीं, जोखिम है, क्योंकि यही मूल्य बाद में प्रत्यावर्तन का आधार बनता है।
| रास्ता | किसके लिए | क़ानूनी आधार | मुख्य शर्त | मुख्य जोखिम |
|---|---|---|---|---|
| फ़्लैट खरीद | विदेशी व्यक्ति | प्रशासनिक व्यवहार | कई स्वीकृतियाँ, डॉलर में भुगतान | निकास कठिन |
| पंजीकृत पट्टा | व्यक्ति, शाखा, कंपनी | संपत्ति अंतरण अधिनियम, धारा 107 | एक वर्ष से अधिक पर पंजीकरण | अपंजीकृत पट्टा कमज़ोर |
| EPZ प्लॉट | निर्माता | BEPZA व्यवस्था | 30 वर्ष का पट्टा | सीमित गतिविधियाँ |
| स्थानीय कंपनी | भारतीय कंपनी | कंपनी अधिनियम 1994 | निगमन | प्रत्यावर्तन नियम |
| विरासत | भारत में बसे उत्तराधिकारी | व्यक्तिगत कानून | उत्तराधिकार प्रमाण, नामांतरण | अर्पित सूची, नागरिकता शर्त |
भारत में रहने वाले उत्तराधिकारी: विरासत का संपत्ति कानून
बांग्लादेश में उत्तराधिकार मृतक के धर्म से तय होता है: मुस्लिम संपत्ति फ़राइज़ के निश्चित हिस्सों से, हिंदू संपत्ति दायभाग कानून से और ईसाई तथा अधिकांश अन्य संपत्तियाँ उत्तराधिकार अधिनियम 1925 (Succession Act 1925) से। हिस्सों का पूरा गणित हमारी inheritance law मार्गदर्शिका में है।
क्या भारतीय नागरिक उत्तराधिकारी बन सकता है?
हमें बांग्लादेश के सामान्य क़ानून में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान ज्ञात नहीं है जो केवल विदेशी नागरिकता के आधार पर किसी को उत्तराधिकार से वंचित करे। व्यवहार में तीन बाधाएँ आती हैं: नामांतरण के लिए उत्तराधिकार का प्रमाण, पहले से अर्पित सूची में दर्ज संपत्ति, और बिक्री राशि बाहर भेजने के नियम।
हिंदू परिवार: दायभाग और सीमित हित
पारंपरिक हिंदू कानून के तहत बांग्लादेश में विधवा और उत्तराधिकारी बनने वाली बेटियाँ प्रायः पूर्ण स्वामित्व के बजाय सीमित या आजीवन हित (life interest) पाती हैं, और उनकी मृत्यु के बाद संपत्ति मूल मालिक के अगले उत्तराधिकारी को जाती है।[13] कुछ बेटियाँ, जैसे निःसंतान विधवा बेटी, उत्तराधिकार से बाहर भी हो सकती हैं।[13] भारत के 1956 के अधिनियम के आधार पर बहनों का बराबर हिस्सा मान लेना बांग्लादेश की ज़मीन पर गलत बिक्री और मुकदमे का कारण बनता है।
उत्तराधिकार का प्रमाण और नामांतरण
उत्तराधिकारियों को पहले वारिस प्रमाणपत्र (warish certificate) या आवश्यकतानुसार अदालत से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (succession certificate), प्रोबेट या प्रशासन-पत्र लेना होता है, फिर नामांतरण कराना होता है। अदालत से जारी उत्तराधिकार प्रमाणपत्र की प्रक्रिया के लिए हमारी succession certificate मार्गदर्शिका देखें। जब तक खतियान उत्तराधिकारियों के नाम पर अद्यतन नहीं होता, 2023 के अधिनियम की धारा 6(3) बिक्री और पावर ऑफ़ अटॉर्नी दोनों को रोकती है।[9]
शत्रु संपत्ति और अर्पित संपत्ति: विरासत का कठिन अध्याय
"शत्रु संपत्ति" की व्यवस्था 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में जारी आपातकालीन क़ानूनों से निकली, और इसका सबसे गहरा असर उन परिवारों पर पड़ा जो भारत चले गए थे।[21] स्वतंत्रता के बाद यही व्यवस्था "अर्पित संपत्ति" के नाम से जारी रही। हर पुरानी पारिवारिक संपत्ति अर्पित नहीं है, और हर अर्पित सूची प्रविष्टि वैध भी नहीं है।
23 मार्च 1974 की सीमा
फ़रवरी 2026 के एक निर्णय में उच्च न्यायालय प्रभाग ने अपीलीय प्रभाग के प्रमुख निर्णय अरति रानी पाल बनाम सुदर्शन कुमार पाल (Aroti Rani Paul v Sudarshan Kumar Paul) पर भरोसा करते हुए दोहराया कि 1969 के अध्यादेश संख्या 1 के निरसन की तारीख 23 मार्च 1974 के बाद किसी संपत्ति को नए सिरे से अर्पित या अनिवासी संपत्ति के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता था, और ऐसी कोई भी सूचीकरण अवैध है।[12] उस मामले में 1977 में शुरू किए गए अर्पित संपत्ति मामले के आधार पर की गईप्रविष्टि अवैध ठहराकर ज़मीन 'क' अनुसूची से मुक्त करने का निर्देश दिया गया।[12]
अदालत ने यह भी माना कि प्रथम दृष्टया अधिकार-क्षेत्र से बाहर सूचीकरण के विरुद्ध न्यायाधिकरण में जाए बिना रिट याचिका दायर की जा सकती है।[12] इसलिए राजपत्र प्रविष्टि की तारीख, आधार और खतियान विवरण बारीकी से जाँचें।
अर्पित संपत्ति प्रत्यर्पण अधिनियम 2001 और नागरिकता की शर्त
अर्पित संपत्ति प्रत्यर्पण अधिनियम 2001 (Vested Property Return Act 2001, अधिनियम संख्या 16, 2001) संपत्ति को मूल मालिकों या उनके उत्तराधिकारियों को लौटाने के लिए बनाया गया था। पर अधिनियम की धारा 2 में "मालिक" की परिभाषा में मूल मालिक, उत्तराधिकारी, हित-उत्तराधिकारी और सह-हिस्सेदार को बांग्लादेश का नागरिक और स्थायी निवासी होना आवश्यक है।[11] इसका सीधा परिणाम यह है कि जो उत्तराधिकारी आज केवल भारतीय नागरिक है, वह इस अधिनियम के तहत अपने नाम पर वापसी का दावा करने का पात्र नहीं है।
अधिनियम में ज़िलेवार न्यायाधिकरण, 45 दिनों के भीतर अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील और आवेदन की समय-सीमाएँ थीं; संशोधित पाठ के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2013 थी।[11] धारा 6 कुछ संपत्तियों को वापसी सूची से बाहर रखती है, जैसे जिन्हें सरकार ने स्थायी रूप से हस्तांतरित किया हो या दीर्घकालिक पट्टे पर दिया हो, या जो सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अधिग्रहित हो चुकी हों।[11]
भारत में बसे परिवारों के लिए व्यावहारिक निष्कर्ष
पहला, पता करें कि संपत्ति अर्पित सूची में है या नहीं, और प्रविष्टि कब और किस आधार पर हुई। दूसरा, यदि परिवार का कोई सदस्य अब भी बांग्लादेश का नागरिक और स्थायी निवासी है, तो संपत्ति कानून के तहत उसकी स्थिति अलग है। तीसरा, सूचीबद्ध संपत्ति को "सस्ते में" खरीदने के प्रस्तावों से बचें; ऐसे लेन-देन अक्सर भूमि अपराध अधिनियम के तहत धोखाधड़ी की श्रेणी में आते हैं, जिसकी अधिकतम सज़ा सात वर्ष की कैद है।[9]

विदेश से बिक्री: पावर ऑफ़ अटॉर्नी के ज़रिए
भारत में रहने वाला मालिक या उत्तराधिकारी हर कदम के लिए बांग्लादेश नहीं जा सकता, इसलिए पावर ऑफ़ अटॉर्नी केंद्रीय दस्तावेज़ बन जाता है। पावर ऑफ़ अटॉर्नी अधिनियम 2012 (Power of Attorney Act 2012) की धारा 2 के अनुसार अचल संपत्ति बेचने, बिक्री अनुबंध पर हस्ताक्षर करने, ऋण के लिए बंधक रखने या प्रतिफल के बदले भूमि विकास के लिए दिया गया अधिकार "अपरिवर्तनीय" पावर ऑफ़ अटॉर्नी है, और धारा 6(1) के तहत इसका पंजीकरण अनिवार्य है।[14] विस्तृत विश्लेषण हमारी power of attorney मार्गदर्शिका में है।
भारत में हस्ताक्षर: बांग्लादेश उच्चायोग
नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के अनुसार हर निष्पादक को स्वयं उपस्थित होकर कांसुलर अधिकारी के सामने हस्ताक्षर करने होते हैं; बांग्लादेशी पासपोर्ट या "No Visa Required" (NVR) स्थिति वाला विदेशी पासपोर्ट चाहिए; और भूमि संबंधी दस्तावेज़ों के लिए अद्यतन भूमि कर रसीद (दाखिला) तथा अद्यतन खतियान भी जमा करने होते हैं।[16] दस्तावेज़ नियमों की अनुसूची-क, फ़ॉर्म-3 के प्रारूप में होना चाहिए, और उच्चायोग के अनुसार हस्ताक्षर के दो महीने के भीतर ढाका में विदेश मंत्रालय से सत्यापन कराना होता है।[16]
फ़रवरी 2025 में नियमों में संशोधन कर बांग्लादेशी पासपोर्ट की अनिवार्यता हटाई गई: अब NVR स्टिकर वाला विदेशी पासपोर्ट, राष्ट्रीय पहचान पत्र या जन्म पंजीकरण प्रमाणपत्र भी मान्य है, और विदेश में निष्पादित पावर ऑफ़ अटॉर्नी को सत्यापन के छह महीने के भीतर बांग्लादेश भेजना होता है।[15] जिनके पास इनमें से कोई दस्तावेज़ नहीं है, वे उच्चायोग से पहले पुष्टि करें।
ढाका में प्रमाणीकरण, स्टांप और पंजीकरण
अधिनियम की धारा 6 के अनुसार विदेश में रहने वाले प्रधान के मामले में पंजीकरण अधिनियम की धारा 33(1)(c) लागू होती है, और दस्तावेज़ को विदेश मंत्रालय से प्रमाणित कराने के बाद स्टांप अधिनियम 1899 की धारा 18 के तहत स्टांप लगवाना होता है।[14] केवल प्रबंधन, किराया वसूली या नामांतरण आवेदन जैसे कार्यों के लिए दिया गया सामान्य पावर ऑफ़ अटॉर्नी धारा 11 के तहत पंजीकृत डाक से 30 दिनों के नोटिस द्वारा समाप्त किया जा सकता है।[14] अपरिवर्तनीय पावर ऑफ़ अटॉर्नी प्रधान की मृत्यु से अपने-आप समाप्त नहीं होता; अधिकार और दायित्व उत्तराधिकारियों पर चले जाते हैं।[14]
जोखिम जिन्हें टालें
"सारी संपत्ति" बेचने वाला व्यापक पावर ऑफ़ अटॉर्नी, बिना मौज़ा, खतियान और दाग संख्या के, और एजेंट के निजी खाते में बिक्री राशि, दोनों से बचें। दस्तावेज़ को एक संपत्ति, एक लेन-देन और एक बैंक मार्ग तक सीमित रखें, और जाली पावर ऑफ़ अटॉर्नी के संदेह पर तुरंत कार्रवाई करें; भूमि जालसाज़ी 2023 के अधिनियम की धारा 5 के तहत अधिकतम सात वर्ष की कैद से दंडनीय है।[9]
बिक्री राशि भारत लाना
30 सितंबर 2026 के बांग्लादेश बैंक के FEPD-1 परिपत्र संख्या 40 के अनुसार अचल संपत्ति की बिक्री राशि भेजने के अनुरोध अधिकृत डीलर बैंक स्वयं स्वीकृत नहीं कर सकता; उसे सहायक दस्तावेज़ों के साथ बांग्लादेश बैंक को भेजना होता है।[17] मृत व्यक्ति की संपत्ति से अनिवासी लाभार्थियों को भेजी जाने वाली राशि के लिए भी बांग्लादेश बैंक में आवेदन चाहिए, जिसमें प्रोबेट के बाद वसीयत की प्रति या प्रशासन-पत्र, संपत्ति का पूरा विवरण और मृतक की राष्ट्रीयता और निवास की जानकारी शामिल होती है।[17]
जो राशि भेजने की अनुमति नहीं मिलती, उसे निष्पादक या प्रशासक के नाम पर बांग्लादेश के किसी बैंक के अवरुद्ध खाते में जमा किया जा सकता है।[17] भारत की ओर से, विदेशी मुद्रा प्रबंधन (विदेशी निवेश) नियम 2022 का नियम 21(2) भारत के निवासी को भारत से बाहर रहने वाले व्यक्ति से विरासत में भारत के बाहर की अचल संपत्ति प्राप्त करने की अनुमति देता है।[18]
संपत्ति कानून के विवाद: मंच और रणनीति
संपत्ति विवाद सामान्यतः दीवानी अदालतों में स्वामित्व (title suit), बँटवारा, विशिष्ट पालन, निषेधाज्ञा और दस्तावेज़ रद्द करने के मुकदमों के रूप में चलते हैं। सीमा अधिनियम 1908 (Limitation Act 1908) की अनुसूची के अनुच्छेद 142 और 144 के तहत अचल संपत्ति के कब्ज़े के मुकदमों की सीमा बारह वर्ष है।[20] भारत में बैठे मालिकों के लिए यही सबसे बड़ा ख़तरा है। स्वामित्व के मुकदमे पर हमारी title suit मार्गदर्शिका देखें।
बेदखली पर त्वरित उपाय
2023 के अधिनियम की धारा 8 के तहत जिसे अदालत या सक्षम प्राधिकारी के आदेश के बिना उसकी ज़मीन से बेदखल किया गया हो, वह कब्ज़ा बहाल कराने के लिए संबंधित क्षेत्र के कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास आवेदन कर सकता है।[9]
अनिवार्य मध्यस्थता और वाणिज्यिक विवाद
विधिक सहायता सेवा (संशोधन) अधिनियम 2026 (Legal Aid Services (Amendment) Act 2026) की धारा 21B के तहत कवर किए गए ज़िलों में कुछ दीवानी और पारिवारिक विवादों में मुकदमा दायर करने से पहले मध्यस्थता अनिवार्य है, और जुलाई 2026 में यह व्यवस्था दस और ज़िलों तक बढ़ाई गई।[19] बँटवारे जैसे पारिवारिक भूमि विवाद अक्सर इसी दायरे में आते हैं, इसलिए दायर करने से पहले ज़िले की स्थिति जाँचें; बँटवारे के मुकदमे पर हमारी partition suit मार्गदर्शिका देखें। कंपनियों के बीच बड़े पट्टा या निर्माण विवादों में वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम 2026 (Commercial Courts Act 2026, अधिनियम संख्या 23, 2026) और अनुबंध के मध्यस्थता खंड की प्रासंगिकता भी जाँचें।

भारतीय खरीदारों और उत्तराधिकारियों के लिए क्रमबद्ध प्रक्रिया
TRW भारतीय ग्राहकों के खरीद, पट्टा और विरासत के मामलों को इसी क्रम में संभालता है।
संरचना तय करें
खरीद, पट्टा, EPZ या स्थानीय कंपनी में से माध्यम चुनें।
अभिलेख जाँचें
खतियान, नामांतरण, भूमि विकास कर और 25 वर्ष का इतिहास देखें।
भार जाँचें
सब-रजिस्ट्री तलाशी, बंधक, कुर्की और अर्पित सूची की पुष्टि करें।
कब्ज़ा देखें
स्थल पर वास्तविक कब्ज़ेदार और सीमाएँ पहचानें।
बायना पंजीकृत करें
साठ दिनों के भीतर बिक्री अनुबंध प्रस्तुत करें।
कर चुकाएँ
पंजीकरण शुल्क, स्टांप, स्थानीय कर और स्रोत कर दें।
विलेख और नामांतरण
विलेख पंजीकृत कराएँ और तुरंत नामांतरण आवेदन करें।
धन मार्ग तय करें
बैंक मार्ग अपनाएँ और प्रत्यावर्तन शर्तें पहले जाँचें।
अभिलेख और नामांतरण के लिए हमारी भूमि अभिलेख और नामांतरण प्रैक्टिस उपलब्ध है, और संपत्ति विवादों के लिए रियल एस्टेट विवाद प्रैक्टिस।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या कोई भारतीय नागरिक बांग्लादेश में ज़मीन खरीद सकता है?
सीधे नहीं। पट्टा, किराया या विदेशी स्वामित्व वाली स्थानीय कंपनी ही रास्ते हैं।[1]
क्या विदेशी बांग्लादेश में फ़्लैट खरीद सकते हैं?
व्यवहार में 1996 से विदेशियों को कई स्वीकृतियों के साथ और विदेशी मुद्रा में भुगतान करके फ़्लैट खरीदने की अनुमति रही है, पर सरकारी एजेंसियों की आवासीय परियोजनाओं में नहीं।[2]
EPZ में ज़मीन किस अवधि के लिए मिलती है?
BEPZA पूरी तरह विकसित प्लॉट 30 वर्ष के पट्टे पर और मानक फ़ैक्टरी भवन 2 वर्ष के नवीकरणीय पट्टे पर देता है।[4]
स्वामित्व जांच में कौन-से दस्तावेज़ ज़रूरी हैं?
क्या बायना का पंजीकरण अनिवार्य है?
हाँ। बिक्री अनुबंध लिखित और पंजीकृत होना चाहिए और निष्पादन के साठ दिनों के भीतर पंजीकरण के लिए प्रस्तुत करना होता है।[8]
पंजीकरण में कुल कितना खर्च आता है?
यह स्थान और संपत्ति पर निर्भर है। जून 2025 के बजट के बाद ढाका में फ़्लैट और ज़मीन की कुल लागत लगभग 12.5 प्रतिशत आँकी गई थी।[10]
क्या भारत में रहने वाला उत्तराधिकारी अर्पित संपत्ति वापस माँग सकता है?
अर्पित संपत्ति प्रत्यर्पण अधिनियम 2001 के तहत दावेदार का बांग्लादेश का नागरिक और स्थायी निवासी होना आवश्यक है, इसलिए केवल भारतीय नागरिक उत्तराधिकारी इसके तहत पात्र नहीं है।[11]
क्या 1974 के बाद किसी संपत्ति को अर्पित सूची में डाला जा सकता था?
नहीं। सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार 23 मार्च 1974 के बाद नई सूचीकरण अवैध है।[12]
क्या भारत से पावर ऑफ़ अटॉर्नी देकर ज़मीन बेची जा सकती है?
क्या बिक्री राशि सीधे भारत भेजी जा सकती है?
अचल संपत्ति की बिक्री राशि भेजने के लिए बांग्लादेश बैंक की स्वीकृति चाहिए; बैंक आवेदन को सहायक दस्तावेज़ों के साथ बांग्लादेश बैंक को भेजता है।[17]
स्रोत सूची
प्राथमिक कानूनी और नियामक स्रोत
सामग्री की जाँच 21 अक्टूबर 2026 को की गई। किसी भी प्रावधान पर भरोसा करने से पहले वर्तमान आधिकारिक पाठ की पुष्टि करें।
- Chambers — Investing In 2026: Bangladesh
- TBS, 12 August 2023 — Foreign buyers and real estate
- Invest Bangladesh press release, 23 August 2026
- BEPZA investment brochure, October 2025
- TBS, 26 June 2026 — Delisted Mongla site
- Prothom Alo English, 26 January 2026 — Mirsharai defence zone
- Transfer of Property Act 1882
- Registration Act 1908
- Land Crime Prevention and Remedy Act 2023
- Prothom Alo, 26 June 2025 — Registration costs (Bangla)
- Vested Property Return Act 2001 (Bangla)
- High Court Division, Writ Petition No. 11222 of 2025
- The Daily Star, 27 May 2019 — Hindu women's right to property
- Power of Attorney Act 2012 (Bangla)
- bdnews24.com — Power of Attorney Rules amended, 2025
- Bangladesh High Commission, New Delhi — Consular services
- Bangladesh Bank FEPD-1 Circular No. 40, 30 September 2026
- RBI — Overseas Investment Rules 2022
- Jagonews24, 21 July 2026 — Pre-case mediation in 10 more districts
- Limitation Act 1908, First Schedule
- The Daily Star, 26 September 2016 — Enemy-turned-vested property
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